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नया जीवन नया पाठ | नहीं , एक बार फिर दुहराया तो नया पाठ | - भक्ति - 3
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पुराण यदि पुराना तो नया क्या है ? न या न वा | नया कुछ और है जो नित नवीन नित्य प्राचीन | - ज्ञान की चेतावनी - 79
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युग बीते , योग बदलते गए| तुम्हारा प्यार आज भी नवीन रूप में स्थित है| धन्य तुम्हारा प्रेम | - भाव - 110
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पुराना - पुराण पुराना , वेद पुराना | फिर नया ? न या , यह नहीं - कुछ नहीं | - ज्ञान की चेतावनी - 143
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अनुभूति कैसी ? मन की एक झंकार जो बार - बार बजी और नवीन सृष्टि सजी ? - ज्ञान - 189
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नस नस में वह रस है जिसे काल कवलित न कर सका | अमर का पुत्र अमर , वस्त्र फटा नवीन आया | - ज्ञान - 216
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नया - कैसा नया ? न या न वा फिर कैसा नया | न प्रकृति नयी न पुरुष नया | न तू नया और न मैं नया | न यह दुनिया नयी और न ये विचार नये | फिर नये की कहानी कैसी ? - ज्ञान - 325
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मानव तू नव नहीं , चिर पुरातन है |
- भक्ति की चेतावनी - 335
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यह यान नया ? नहीं- । यह गाथा ? नहीं । यह संसार ? नहीं | नया - न यह न वह | सभी पुरातन है |
- भक्ति की चेतावनी - 349
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मानव - मान नव - नित्य नवीन | मान अभिमान करना सीखा , अब कुछ नम्र होना सीख । - चेतावनी - 419
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सदा चाहा नया - नया | कभी न कहा न आ न आ | - चेतावनी - 659
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मरूभूमि का वासी क्यों ? तरू भूमि सदा ताजा | आज भी आ जा आज भी आ जा | - चेतावनी - 660
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जड़ है तो सड़ | लड़ विचार जगत से | झड़ पतझड़ ही देखता आया | कहता आया बस अन्त आया | कभी न कहा जीवन में नव बसन्त आया |
- चेतावनी - 693
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दिल में नया रंग , आँखों में नई ज्योति , जीवन के नये कार्य , किसके बल पर ? बलदेव यह तेरा ही बल है | - भक्ति - 709
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खून का बलबला था जब दुनिया अच्छी लगती थी , ठंडा पड़ा , नीरस हुई किन्तु मन ? यह तो नित्य नूतन है , नव तन नूतन | ये तो पुराने वस्त्र हैं जिन्हें धो कर भी मैल साफ न कर सका | क्यों ? यह दिल से पूछो | - ज्ञान की चेतावनी - 735
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मानव है इसलिए मान करता है , अभिमान करता है | मानव तू नव नहीं , चिर पुरातन है अभिमान न कर |
- ज्ञान की चेतावनी - 824
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प्रिय की बातें प्रिय , यह तो पुरानी बात है | आज नवीन युग में भी प्रिय प्रिय है , उसमें हेर - फेर नहीं | - भक्ति - 828
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ताजा जाता रहा , बासी , वासी बन गया | अब आकर्षण कहाँ ? सत्य न ताजा न बासी , सदा सर्वत्र वासी , अब क्यों उदासी ?
- ज्ञान की चेतावनी - 891
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चिन्ता को चिता पर रख | नवीन जीवन तेरी प्रतीक्षा कर रहा है |
- भक्ति की चेतावनी - 1252
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प्रथम दर्शन यदि हृदय स्पर्श न कर सका तो दर्शन की अभिलाषा कुंठित | प्रथम दर्शन यदि मन हर्षित कर सका तो नव जागरण आरम्भ |
- भक्ति - 1597
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आगामी उत्सव ( 3 महीना )
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आगामी उत्सव हिंदी तिथि के अनुसार दिये गयें है कृपया अंतिम जानकारी सबंधित सदनों से लें |(Year-2022-2023.)
(Email :- info@bhavnirjharini.com)
भाव निर्झरिणी (Help File-Click Download PDF)
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