Bhav Nirjharini  |  SantMani  | 
Sahitya
 |  Sadan  |  Utsav

    21/5/2024   Tuesday
भक्त भी क्या अहंकारी होता है ? हाँ , यदि भक्ति का मर्म न समझे | नकल असल से भयानक | स्वयं को धोखा देता और अन्य जन को धोखे में डालता |  - चेतना - 1305

चैत्र में चेत --
अधीर न हो प्राणी | होली , सो होली | अब चेत , चैत्र आया प्राणों में नया रंग बरसा | नया रंग जो जम गया था वासना के नसों में |
भक्ति की चेतावनी-1146

------------------------------------------------------------
भाव निर्झरिणी(Help-Video Click)
-------------------------------------------------------------
74-Videos on youtube
Click here


Select Word :
  • दाम , काम , नाम फिर कहीं राम - व्यवहार| राम , काम , नाम फिर कहीं दाम - पुरुषार्थ | - भक्ति की चेतावनी - 20
  • हैरान है , क्यों ? हाय राम देख नहीं पाता , कह नहीं पाता , हो नहीं पाता | - भक्ति की चेतावनी - 23
  • रमता राम , भगता काम | - भक्ति - 30
  • राम ने स्थूल राक्षसों को मारा | नाम ने सूक्ष्म असुरों को और खुद ने खुदी को मार काम बनाया | - ज्ञान की चेतावनी - 31
  • अवस्था देख कल्पना न कर कि केवल कष्ट है | दुःख यों है कि न राम जाना न काम जाना | - ज्ञान की चेतावनी - 51
  • राम रस ( नमक ) के बिना सभी पदार्थ फीके | - भक्ति की चेतावनी - 80
  • दीर्घ जीवन ( काल ) किस काम का , जब काम का पता न हो , राम का पता न हो और न हो आराम का | - ज्ञान की चेतावनी - 85
  • हैरान होता है , जान है राम फिर क्यों हैरान ? - भक्ति की चेतावनी - 89
  • शिष्य चार प्रकार का , - (१) नाम का ( नाम मात्र ) ( २) काम का ( भोग ऐश्वर्य ) ( ३) आराम का ( मानसिक शान्ति ) ( ४) राम का ( रमने के लिये ) | - ज्ञान - 91
  • राम आराम क्यों न कर सका ? सभी कहते आ राम | राम को कहाँ आराम ? - भक्ति - 106
  • राम ने सीता त्यागी मैं ने गीता त्यागी अब गाऊँ क्या सुनाऊँ क्या रिझाऊँ क्या कुछ न कहूँ अपने में बहूँ | - ज्ञान - 108
  • आराम भवन , आराम भवन शत शत प्रणाम आराम भवन जुग जुग जीओ आराम भवन हम सुखियों का आराम भवन संत का प्यारा राम भवन आराम भवन , आराम भवन गुरु दरश कराया राम भवन निज रूप लखाया राम भवन आराम भवन , आराम भवन ।| - भक्ति - 113
  • भ्रम की दवा ? रम | राम में | - चेतावनी - 113
  • पाप की भावना को पुण्य की भावना से बदल | राशिवाला , राशि वाले को बदलता है | ( कंस को कृष्ण , रावण को राम बदलता है ) - ज्ञान की चेतावनी - 120
  • तू है तो राधा भी है , श्याम भी सीता है राम भी - तू न होता तो कुछ न होता , कौन गाता ? कौन रिझाता ? - भक्ति - 155
  • आराम ही आराम | काम का क्या काम , न चाम और न दाम , न श्याम और न राम , आराम ही आराम | - भक्ति - 156
  • फिर काम और राम ? काम बनाना , राम भुलाना | - चेतना - 160
  • राधा - प्रेम में धारा बन गई और मीरा ? मीरा - रामी या राम ही में रम गई | प्रेम अहं को नहीं चाहता | वह मिश्री बन कर पिघल जाता है | नमक जलमय हो जाता है | - भक्ति - 163
  • राम को मर्यादा में देखा , कृष्ण को योग और भोग में | अपने को अभाव में | सोच तो , क्या ? सीमा उचित है ? - भक्ति की चेतावनी - 207
  • काम क्रोध पर विजय चाहता है | अपने राम पर विजय पा , विजय ही विजय है | - भक्ति की चेतावनी - 208
  • ये मारने वाले - राम में क्यों नहीं रमते ? काम बने । मारने वाला भी कभी फलता , सफलता पाता है ? - चेतना - 212
  • मारने वाले रमते राम को जानते तो भूलकर मार का नाम न लेते | - चेतना - 213
  • किसी ने कहा श्याम कह | किसी ने कहा राम | ख़ुद ने कहा - खुदा बन , सब चले आयेंगे तेरे द्वार पर | - भाव - 214
  • तुम राम भी कृष्ण भी - राम कृष्ण भी | विवेक और आनन्द तो तुम्हारे शिष्य हैं | - भक्ति - 217
  • जहाँ देखा राम , वहीं कहा आराम और लिया आराम | - भक्ति की चेतावनी - 220
  • शान्ति है वहीं जहाँ विचारों की अशांति है । शिव के हृदय में राम , गले में हलाहल , किन्तु मुख में राम है | - चेतावनी - 240
  • चार युग - चार बात | धर्म अर्थ काम राम | - चेतावनी - 256
  • काम राम में रमे तो अकाम हो | - ज्ञान की चेतावनी - 263
  • राम कथा । जग मिथ्या । यही सीखा । फिर जाना क्या ? जानता तो मानता । - चेतावनी - 265
  • मेरा धाम तेरा नाम मेरी जाम तेरा नाम मेरा काम तेरा नाम मेरा राम तेरा नाम | - भाव - 267
  • गौ का दूध पीया | पिया का प्यार पी न सका | पिया पाया प्यार में | प्यार था यार में | यार रमा था आराम में | आराम था राम में | राम रमा था रोम में | रोम का होम हो रहा था ओम में | ओम था सोहं में और सोहं तो स्वयं ही था | - ज्ञान की चेतावनी - 268
  • जब तक काम , कहाँ राम , कहाँ आराम | - चेतना - 274
  • राजस नहीं - सज राम - रम जा | या सज राधा - बाधा दूर हो | - ज्ञान की चेतावनी - 278
  • काम की कहता आया | राम की कही वह भी काम के लिए | - चेतना - 279
  • सनक नहीं - संग कर बहक नहीं - बह कर सम पर आ , चाहे नाच - चाहे गा , सम पर आ | सम पर श्याम , सम पर राम , सम पर सोऽहं , सम पर शिवोऽहं | - ज्ञान की चेतावनी - 305
  • मर या रम | मर बाबा के लिये जो अमर कर दे , रम राम में जो बन वास न करना पड़े | इसे तन कह , बन कह , मन कह | - भक्ति की चेतावनी - 306
  • कामरस लोगे या रामरस ? काम रस काम न आयेगा और राम रस ? आराम देगा | - भक्ति की चेतावनी - 309
  • रोटी की बात छोटी | रोते को हँसाता , भार हटाता | राज बताता - राज दिलाता ऐसा राजा | साज सजाता | सेज बिछाता - दिल रमाता - राम रमाता ऐसा बाबा | - भक्ति - 337
  • मर्यादा पुरुषोत्तम राम | राम कहते मर , याद आ तभी पुरुषोत्तम | - भक्ति की चेतावनी - 337
  • दशरथ आज राम खोज रहा है | मन राम तो तन आराम | - चेतना - 341
  • सीधा राम , न सीता राम | - चेतना - 342
  • राम रावण के लिये रावण अर्थात् रुलाने वाला है किन्तु विभीषण की दुःख की भीषणता हटाने वाला है | - चेतना - 379
  • सन्त अवतारी से महान हैं | अवतारी आते हैं किसी को दंड देने किन्तु यह सन्त ही है जो रावण और राम को गोद में बैठाते हैं | सन्त बादलों की तरह छाया करते हैं और जीवन को सुखमय बना देते हैं | - भक्ति की चेतावनी - 388
  • है राम तो हैरान क्यों ? हराम है , हैरान है | हराम है खाना और हैरान है दिमाग यदि है राम को जान न पाया | - चेतावनी - 399
  • काम राम में रमण करने लगा | काम , काम न रहा , काम राम हो गया | - भक्ति - 402
  • क्रोध की सुनी , काम की सुनी , अब अपने राम की भी सुन | - चेतावनी - 407
  • किसी को माना भी तो चमत्कार के कारण | राम यदि रावण का वध न कर पाते तो शायद राम की भी पूजा न होती | ज्ञान भक्ति भी तभी पूजित जब चमत्कारपूर्ण हो | - ज्ञान - 410
  • नया वर्ष - नया काम | काम से उपराम | राम में आराम , यही काम ,यही काम | - चेतावनी - 434
  • राम का झरोखा देखा मन्दिर के रूप में , किन्तु हे सर्वव्यापी राम ! तेरा झरोखा कहाँ नहीं ? - भाव - 446
  • राम रमता है , मरता नहीं , अमर बनाता है | मरता है वह जो रमता नहीं - राम में जो रमता नहीं | - भक्ति की चेतावनी - 454
  • तू नहाता नहीं , तुझे राम कैसे मिलेगा ? चिन्ता न कर | जब आँसुओं से राम को नहलाया , तो फिर कहाँ काया ? - भक्ति - 455
  • ये भाव रात दिन उठते बैठते हैं , परिश्रम ही करते रहते हैं , विश्राम कहाँ लेते हैं ? बिसरा राम , राम को बिसारा तो विश्राम कहाँ ? - भक्ति की चेतावनी - 463
  • सभी काम में लगे है | कुछ राम में भी लगे , कुछ आराम में भी | भज राम अभिराम , अविराम | - चेतावनी - 475
  • मार खाते-खाते राम-राम नहीं रमा-रमा भजने लगा | फिर तो ऐसा रमा कि भूल गया अपने राम को | - चेतावनी - 477
  • गुण के गीत गाकर क्या करूँगा ? अवगुण की कथा का अंत नहीं | यदि संत के दर्शन होते तो सत्य के दर्शन होते और शांत होता मेरा धाम जहाँ विराजमान है राम और श्याम | - भाव - 479
  • राम का अवतार और कृष्ण का अवतार हुआ | अब तार किस का जम रहा है , जो सत्य का पुजारी है | - ज्ञान की चेतावनी - 483
  • जीवन से हार कर राम भजा तो क्या भजा ? हार में उत्साह कहाँ ? - भक्ति की चेतावनी - 537
  • गम में न राम | कम कर मन का भ्रमण न थके न रुके ऐसा प्रेम प्रवाह हो | - चेतावनी - 550
  • काम ने कहा - मुझे ग्रहण कर या राम को , नहीं तो दुनिया में जीना दुश्वार हो जायेगा | सत्य के पुजारी ने कहा - आ काम प्रभु कृपा से तेरा भी काया कल्प कर दूँ | राम में तुझे मिला दूँ | काम घबडा उठा | सत्य के पुजारी की सदा विजय | - भाव - 563
  • तेरा रखवाला कौन ? बाहर देखना चाहता है की भीतर . भीतर राम , बाहर श्याम | - भाव - 580
  • भाव उपासक के लिए कोई साधना नहीं | उसका शरीर मन्दिर , हृदय सिंहासन पर विराजमान इष्ट | सम्पूर्ण विश्व उसकी आत्मा | सत्य से आवेष्टित उसका रोम-रोम | राम और श्याम उसके दो हाथ | माया और काया उसके दो चरण | निर्भय विचरण | जीवन अनुपम | - भाव - 587
  • भक्त ने पुकारा - भगवान हुआ , राम हो या कृष्ण | - भक्ति - 593
  • काम बुरा तो काम से क्या काम ? राम भला तो कर आराम , कह आ राम | - भक्ति की चेतावनी - 593
  • दम घुटता है दाम के लिए , नाम के लिए , काम के लिए | जरा सुबह - शाम श्याम से मिल , राम से मिल कि यह घुटन बन्द हो | आनन्द कन्द के खेल ही अनोखे | - चेतावनी - 639
  • आह्लाद ही प्रहलाद की रक्षा रस रूप राम करता है | राक्षसी चिन्ता जली , आनन्द ही आनन्द | - भक्ति की चेतावनी - 683
  • देखा काम , किया ऐसा काम कि काम ही हो रहा | काम अशान्त , राम प्रशान्त | - ज्ञान की चेतावनी - 687
  • काम राम की जोड़ी , क्षण में लंका तोड़ी | कैसी लंका ? जहाँ आज भी रावण रहता है | राम चुप , क्योंकि सीता शांति छिन गई भ्रम में | - चेतना - 709
  • राम को पुकारना कैसा ? राम में आराम करे तो कहना न पड़े आ , राम | - भक्ति की चेतावनी - 709
  • क्षेत्रज्ञ बना , जब क्षेत्र जाना कर्म मर्म का | छत्र धारण किया , जब मन का राजा हुआ | देव , देवी आराधना में लगे उसके , आज वह राजा है प्रेम राज्य का , जहाँ भगवान भी भिक्षुक बनें | प्रेम किसे अप्रिय है ? अप्रिय उसके लिये , जिसके प्रिय न हो राम बैदेही | - भक्ति की चेतावनी - 727
  • अरी सीता , राम का प्यार देखा ? तू तो धरती में समा गई लाज से किन्तु अब राम कहाँ समाये ? वह जल समाधि लेगा तेरे वियोग में | - भक्ति की चेतावनी - 728
  • राम के पास लक्ष्य था लक्ष्मण था | भरत तो भक्ति में रत था , वहाँ शत्रुघ्न भी सेवा में लगा था | दास और दासी तो थे हनुमान और सीता | एक ने दिल चीर कर दिखलाया राम को और एक ने दिल में बसाया राम को | दिखाती किसे , धरती में समा गई | दुनिया देखे प्यार कैसा होता है | - भक्ति की चेतावनी - 729
  • राम मरा नहीं , आज भी अमर है भक्त के लिये | कृष्ण का आकर्षण गया कहाँ ? आज भी बातें नचा देती हैं मधुर कल्पना को | - चेतना - 731
  • नाम , ग्राम , काम | नाम उसका , जिसने प्रिय के नाम में ही नाम समझा | ग्राम - यदि स्थान विशेष है तो ' गिरा मैं ' | यदि गिरह में प्यार बाँधा तो सम्पूर्ण विश्व ही ग्राम और आराम | काम - सुबह - शाम , श्याम-श्याम , राम-राम | खाऊँ क्या ? खा काल को | पहनूँ क्या ? पहन वह भाव पाहन भी हन न कर सके अन्तरात्मा को | - चेतावनी - 752
  • अरे काम के जगाने वाले ! मेरे राम को जगा | प्रभात हो , सौ बात हो | फिर संध्या , फिर रात हो | - भक्ति - 769
  • नयनाभिराम कौन ? अभी राम , अभी काम | अभी धाम अभी दाम | कभी तो सोचो - सब यहीं धरा रह जायेगा , जब कूच करेगा बनजारा | - चेतावनी - 814
  • ये शब्द कभी तो बह निकलते हैं और कभी बहना दूर कहना भी नहीं चाहते राम कथा | - भक्ति - 815
  • भाव हनुमान है कि राम ? भाव सीता है जो वियोग में छटपटा रही है प्रिय के | - भक्ति की चेतावनी - 818
  • इन शत्रुओं को मित्र बना कर भेजा जो प्रथम लुभाते हैं , फिर तडपाते हैं | ये तेरे काम ? फिर कहता है - भज राम , तज काम | - भक्ति - 826
  • संगीत सुना था राधा ने संग हो गई कृष्ण के | वाणी सुनी थी कबीर ने रामानन्द की , राम में ही रम गया | पद गाते गाते मीरा ने द्वारकाधीश के पदों में ही आत्म-समर्पण किया | तुमने क्या किया ? जरा सोच | - चेतावनी - 835
  • मुझे ले चल अपने ग्राम ओ राम | गा राम यही है मेरा ग्राम | - भक्ति - 873
  • देखो मुझे छेड़ते हैं ? कौन , घर बाहर वाले | घर में काम और बाहर में भी काम जब देखो तो काम , फिर कहाँ आराम | सुबह शाम - काम काम | राम कब भजूँ | - भक्ति - 886
  • प्रेम में राम भी पागल था , सीता भी | फिर इस पागलपन को क्यों प्रोत्साहन देते हैं , जागतिक , धार्मिक लोग ? - भक्ति की चेतावनी - 910
  • रमने वाला राम अयोध्या का वासी कैसे हुआ ? योद्धा कहाँ ? वह तो पराजित है प्रणय पीड़ा से | - भक्ति - 945
  • विजय किसकी ? क्रोध की , काम की या राम की ? दैविक शक्ति सिंह सदृश्य कामना पर भी विजय पाती है | - ज्ञान की चेतावनी - 965
  • जो राम में रमा उसी का जीवन सफल और तो यों ही आते यों ही जाते | - भक्ति की चेतावनी - 976
  • काम में भी लगन , राम में भी लगन | लगन नहीं तो मगन कैसे होगा प्राणी | प्राण बेचैनी का नाम नहीं , बेचैनी तो कार्य की पूर्ति के लिये है यदि लगन का अभाव है | - ज्ञान की चेतावनी - 1021
  • संतों की नगरी शांत | हुल्लड़ वाले घबड़ाये | न रूप न नाम | यह कैसा राम ? - चेतना - 1036
  • कामना - काम में ही छिप रही - राम न खोजा | काम में ही आराम फिर राम का क्या काम ? - चेतना - 1037
  • नील गगन में , श्याम सागर में मेरा श्याम कहाँ , राम कहाँ ? पागल , गर्दन झुका , देख दिल के आइने में , बाहर क्यों ? - भक्ति - 1057
  • काम पर दुनिया नाचे | दाम पर दुनिया नाचे | तू नाम पर राम के नाम पर नाचा | अब दुनिया तेरी , तू दुनिया का , चाहे नचा , चाहे बचा | - भक्ति - 1068
  • अबोध , अज्ञानी प्राणी कह कर संसार ने लगाया काम में | अब काम ही राम बन बैठा , आराम कहाँ ? - भक्ति - 1069
  • राम मरा नहीं , आराम कर रहा है अपने प्यारों के हृदय में | कृष्ण गया नहीं , अब भी बाँसुरी बज रही है गोकुल में . - चेतना - 1074
  • सुबह श्याम यदि श्याम श्याम कहता तो आराम आता , राम आता | - भक्ति की चेतावनी - 1093
  • मर्यादा ने राम दिखलाया , चंचलता में श्याम | वहाँ सभी गंभीर , यहाँ युद्ध में गीत - गीता | - भक्ति - 1100
  • क्यों दुनिया को देखूँ ? अपने राम को न देखूँ कि शांति मिले | हराम में राम खोजना , हैरान करेगा , आराम में राम है ही , फिर खोजना क्या ? - चेतना - 1170
  • ग्राम बसा है तो राम भी बसा है | ग्राम बाहर राम भीतर | - भक्ति की चेतावनी - 1173
  • आनंद तेरा धाम कहाँ ? राम में काम में | सुबह में , शाम में | जाम में पैगाम में | नाम में बदनाम में | दाम में वाम में | चाम में विश्राम में धाम ही धाम है | - भक्ति - 1184
  • सियाराम कहूँ या पियाराम ? राधेश्याम कहूँ या प्यारे श्याम ? प्यार ने अमर बनाया राधा को , श्याम को | - भक्ति - 1326
  • श्याम की संध्या , राम का प्रभात | अब दिन और रात ? बात में गुजार या आघात में | बात प्रेम की , आघात संसार का | - भक्ति की चेतावनी - 1374
  • राम बाम | दाम दाहिने | काम सम्मुख | हृदय राम के लिये | दाम दान के लिये | काम ? काम यही है | - भक्ति - 1449
  • पाई पाई जोड़ते जब शांति न पाई , खाने लगा राम दोहाई , देने लगा सफाई . अब सफाई क्या काम आई ? - भक्ति - 1511
  • दुर्दमनीय काम है यह धारणा आज भी अमान्य नहीं करते लोग , आंशिक यह ठीक है किन्तु राम की शरणागति उससे भी कठिन है | - भक्ति की चेतावनी - 1537
  • बाल्मीकी ने कहा - बाल भर भी सोच न कर सब का सहायक राम है | कर्मकाण्डी ने कहा - कि क्या हाथ पर हाथ धर कर बैठ जाऊँ ? उत्तर था अरे पागल , राम की सहायता के बिना तेरा एक काम भी न बनेगा | - भक्ति - 1632
  • रोम-रोम में राम | सुबह शाम में श्याम , रात और दिन की जिन्दगी | बन्दा किसकी करता है बन्दगी ? उसी की जिसने विचारों के बन्धन से मुक्त कर दिया | - भक्ति - 1708
  • अब तक जान न पाया राम बड़ा कि काम ? काम से आया , काम बनाया | अब काम का क्या काम ? राम ही राम , राम ही अभिराम | - भक्ति - 1722
आगामी उत्सव ( 3 महीना )
अमेरीका (वर्जिनिया),आनंद कुंज का वार्षिकोत्सव (उदघाटन-08/06/2014)   -   ज्येष्ठ सुदी दशमी (गंगा दशहरा)
16/06/2024 - रविवार - अमेरीका (वर्जिनिया) -
रांची , अंतरंग आनंद भवन का वार्षिकोत्सव (उदघाटन-09/06/2022)   -   ज्येष्ठ सुदी दशमी (गंगा दशहरा)
16/06/2024 - रविवार - रांची -
पुणे,मातृधारा आनन्द  सत्संग का वार्षिकोत्सव (उदघाटन-24/06/2010)   -   ज्येष्ठ सुदी तेरस
20/06/2024 - गुरूवार - पुणे -
श्रीमती बनासा देवी लाठ (माँ बनासा) का  निर्वाण दिवस--- (11-06-1957, मंडरेला)   -   ज्येष्ठ सुदी चतुर्दशी
21/06/2024 - शुक्रवार - मंडरेला -
वीरगंज (नेपाल), श्री महिला सत्संग सदन का वार्षिकोत्सव (उदघाटन-1983)   -   आषाढ़ सुदी दूज (रथ यात्रा)
07/07/2024 - रविवार - वीरगंज (नेपाल) -
नागपुर, आनंद भवन का वार्षिकोत्सव (उदघाटन-3/07/2011)   -   आषाढ़ सुदी दूज (रथ यात्रा)
07/07/2024 - रविवार - नागपुर -
श्रीमती चंद्राणी अरोड़ा (बीबी जी) का (निर्वाण दिवस-12/07/1989)   -   आषाढ़ सुदी नवमी
15/07/2024 - सोमवार - कोलकाता -
श्री बाबा बलदेव दास का निर्वाण दिवस (29-06-1947 , मंडरेला)   -   आषाढ़ सुदी बारस
18/07/2024 - बुधवार - सब सदनो में -
मंडरेला, श्री बाबा बलदेव दास स्मृति मंदिर का वार्षिकोत्सव (उदघाटन-1978)   -   आषाढ़ सुदी बारस
18/07/2024 - बुधवार - मंडरेला -
गुरू पूर्णिमा   -   आषाढ़ पूर्णिमा
21/07/2024 - रविवार - सब सदनो में -
सतगुरु आनन्दघन का निर्वाण दिवस (17/07/1976,कोलकाता)   -   श्रावण बदी षष्टी
26/07/2024 - शुक्रवार - सब सदनो में -
आगामी उत्सव हिंदी तिथि के अनुसार दिये गयें है कृपया अंतिम जानकारी सबंधित सदनों से लें |(Year-2022-2023.) (Email :- info@bhavnirjharini.com)
भाव निर्झरिणी (Help File-Click Download PDF)
--------------------------------------------------------------

Developed By Shree Anand Matru Satsang,Bhayander(Mumbai)