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    14/4/2024   Sunday
पहाडी मार्ग का सा जीवन बीता कभी नीचे , कभी ऊपर | थका और चल बसा | कभी बसा था अब चल बसा |  - चेतना - 1268

होली --
होली खेली नहीं जाती कुछ दिल में हो तो रंग जाता है दिल , फिर कुछ भी हो दिल दिलदार में ही समा जाता है |
भक्ति-1397

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  • दिवाली में ( ज्ञान ) दीपक जला , होली में ( उसकी ) हो ली | चैत प्रारंभ था फाल्गुन में फाग खेली और अंत हुआ ( कामना का ) | - चेतना - 120
  • फाल्गुन फिर आया | गुण , निर्गुण का खेल छोड़ | खेल फाग , हो जा बाग-बाग | - भक्ति की चेतावनी - 146
  • मल गुलाल मैल न रहे | होली तो होली | - भक्ति की चेतावनी - 150
  • अंधेरे में मिश्री घोली | ( आत्मा ) अब कहा मैं तेरी होली | - ज्ञान - 174
  • प्रह्लाद में आह्लाद | सब में देखा | सब में पाया | - भक्ति - 325
  • जब लगी आग | भूख चली भाग | राग और वैराग | खेल रहे फाग | - चेतना - 333
  • होली ? क्या होली ? किसकी हो , ली | दिल की होली | दिमाग की होली | फिर क्या होली ? - चेतावनी - 373
  • प्रभु का प्यार भी गुनाह ? फिर क्यों प्रह्लाद को दण्ड ? - भक्ति - 373
  • जाग - आई आग (प्रकाश) कहाँ फाग ? यह है नाग | क्यों लेकर बैठा दिल में दाग ? खेल फाग | हो जा बाग-बाग | - चेतावनी - 397
  • होली और रंग | यदि हो ली ( आत्मा ) फिर कथा क्या ? धूलि पड़ी सिर पर जब होली होली चिल्लाता ही रहा | - ज्ञान की चेतावनी - 423
  • रंग ले रंगीले | प्राणों का प्रिय रंग ले | रग रग में राग रंग ले | फाग में सुहाग यही | - भक्ति की चेतावनी - 518
  • रंग से खेलता रहा - रंगा कब ? रंगा तो चंगा | सिर गंगा , दिल भंगा , भाव व्याधि भगा | - भक्ति की चेतावनी - 523
  • खेले बहुत - समझे कम | खेल के रंग समझने वाले तो और भी अल्प | अल्प जीवन , साध अनेक | - चेतना - 539
  • जलती रहे विषयों की आग तू प्रह्लाद है | आग स्वयं जल कर भस्म हो जायेगी | तू सत्य का पुजारी है | - भाव - 565
  • भय ? मृत्यु का ? निरर्थक | होली किसी की आत्मा , अब रास रंग में मस्त हो जा | दुनिया जलती आई चिन्ता की होली में | तू तो प्रह्लाद है | आह्लाद , आनन्द तेरा रूप | - ज्ञान की चेतावनी - 588
  • रंग भी काले , पीले क्यों ? रंग तो एक , जिसमें तुम हम रंगे | प्रेम रंग , अंग अंग | - भक्ति - 609
  • साथी का संग चाहिये | मन का रंग चाहिये | पीने को भंग चाहिये | लड़ने को जंग चाहिये किन्तु रह गया दंग जब स्वार्थ का खेल देखा | - चेतना - 614
  • रंग ही रंग जब रंगनाथ का साथ हुआ | - भक्ति की चेतावनी - 682
  • धूलि से तो खेलता ही आया , अब रंग से खेल | कपड़ा ही रंगा , दिल रंग , कि फिर आवागमन से अवकाश मिले | - भक्ति की चेतावनी - 684
  • कितने अबीर लेकर आये कायर ही थे | वीर होते प्रेम वीर होते तो प्रभु को ही रंग डालते | जीवन रंगीन बन जाता | - भक्ति की चेतावनी - 685
  • प्यार के रंग में साड़ी रंगी - भूल गई कौन सा रंग था ? - भक्ति - 721
  • हो हल्ला क्यों ? यह होली है | हो हल्ला क्यों ? यह दुःखों की झोली है | - चेतावनी - 779
  • दिल के रंग ने तेरा रंग बदल दिया | नीला आकाश नीला मेरे प्रिय का रंग क्योंकि दूर है | समीप होता तो मेरा रंग , रंग डालता तुझे | - भक्ति - 863
  • फाग तो अनुराग बढ़ाता है फिर विराग क्यों ? विराग फाग से नहीं , अनुराग से नहीं , विराग है व्यवहार से जहाँ दिखावा ही दिखावा है | - ज्ञान की चेतावनी - 869
  • बसन्त ने रंग दिखलाया | बस , अंत होने के पूर्व एक बार अंग-अंग में तेरा रंग समाये | तभी बसन्त आया | - भक्ति - 1081
  • अधीर न हो प्राणी | होली , सो होली | अब चेत , चैत्र आया प्राणों में नया रंग बरसा | नया रंग जो जम गया था वासना के नसों में | - भक्ति की चेतावनी - 1146
  • इन रंगीनियों का रंग न रहा और न रहेगा | फिर मनुष्य क्यों सुध बुध भूल बैठता है ? कुछ ऐसा ही करता आया है और कुछ ऐसा ही करता रहेगा | परिवर्त्तन देखे किन्तु इसकी प्रकृति न बदली | - चेतना - 1235
  • है अनुराग जो खेलेगा फाग ? कादा , कीचड़ ही उछाला धर्म , कर्म के नाम पर | अंग अंग में प्रेम तरंग , तब जमे रंग | - भक्ति की चेतावनी - 1262
  • प्रकृति के पुजारियों ने रंग बरसाया काला , पीला , नीला | प्रभु के प्यारों ने प्रिय के प्राणों में रँग डाला अपने प्राणों को , यही उनकी साधना थी | - भक्ति - 1263
  • तेरा रंग देखकर घबड़ाता था जब तक तेरा न था | आज रँगीली दुनिया है क्योंकि तू मेरा है | - भक्ति - 1265
  • अंग अंग में वह रंग भर दे कि जान न पाये तू संग है | नहीं तो क्यों दुनिया बसाई जब तुझी को न जान पाई | - भक्ति - 1277
  • झोली की जिस दिन होली हुई , मन ने कहा - अब ? बुद्धि ने कहा - होली सो होली अब कैसी झोली ? - भक्ति - 1348
  • यह गाना है या रोना है वासना का ? यह हँसना है या फँसना है जगत का | जाग , प्रिय के संग खेल फाग , सुन अंतरात्मा का राग , खिल उठे जीवन बाग़ , नाच रहा मन नाग | सुख दुःख है विचारों के झाग , अब खेल फाग , सुन राग , राग अब बना अनुराग | - भक्ति की चेतावनी - 1357
  • होली खेली नहीं जाती कुछ दिल में हो तो रंग जाता है दिल , फिर कुछ भी हो दिल दिलदार में ही समा जाता है | - भक्ति - 1397
  • एक रंग जब दुसरे में मिला तो रंग ही बदल गया | फिर तुम्हारा रंग कैसा है , जो रंग बदलने ही नहीं देता ? यह वह रंग है , जब चढ़ता है तो दूसरा रंग चढ़ने ही नहीं देता | - भक्ति - 1493
  • गौर कर यह गौरी है शिव की गौरी , जीव के लिये भोरी ( भोली ) है - भोले की भोली है , उसी की होली है | - भक्ति - 1497
  • मैं रंगरेज नहीं , अंगरेज हूँ | वस्त्र का रंग ना ? बस तर होना है | भीतर बाहर तो एक ही रंग है , रग रग में वही रंग है जो मिटता नहीं , मिटाता है राग-द्वेष | - भक्ति - 1585
  • अंतरंग कौन ? अंत तक रँगता रहे हृदय की कलियों को | रंग पक्का अंतरंग पक्का | कच्चा कब हुआ सच्चा ? - भक्ति - 1599
  • रंग का भी अपूर्व सम्मलेन है अंग-अंग में , रोम-रोम में | ओम शब्द ने रोम रोम में ऐसी तरंग उत्पन्न की कि अंग तर हो गया और रंग ऐसा छा गया हृदय पर कि अब कहना क्या , सुनना क्या ? - भक्ति - 1677
  • देखे कपड़े ? क्या देखूँ रंगे हुए हैं | अरे देख दिल भक्त का रंगा हुआ नहीं , रंग में मिलकर अभंग हो गया है , असंग हो गया है | - भक्ति - 1698
आगामी उत्सव ( 3 महीना )
श्रीमती चंद्राणी अरोड़ा (बीबी जी) का (जन्म दिवस-12/04/1916)   -   चैत्र सुदी नवमी (रामनवमी)
17/04/2024 - बुधवार - कोलकाता -
पिलानी, श्री आनन्दघन सत्संग कुटीर का वार्षिकोत्सव (उदघाटन-22/04/2005)   -   चैत्र सुदी तेरस
21/04/2024 - रविवार - पिलानी -
चुरू, आनन्दघन भाव कुटीर का वार्षिकोत्सव (उदघाटन-05/04/2004)   -   चैत्र सुदी पूर्णिमा
23/04/2024 - मंगलवार - चुरू, -
घाटशिला,विद्यालय,सन्त श्री नन्दलाल स्मृति विद्या मंदिर का वार्षिकोत्सव (उदघाटन-12/05/1986)   -   बैशाख सुदी तृतीया (अक्षय तृतीया)
10/05/2024 - शुक्रवार - घाटशिला -
गुवाहाटी, श्री शान्ति सत्संग सदन का वार्षिकोत्सव(उदघाटन-1984)   -   बैशाख सुदी तृतीया (अक्षय तृतीया)
10/05/2024 - शुक्रवार - गुवाहाटी -
श्रीमती पन्ना देवी गुप्ता ( ताईजी ) का (निर्वाण दिवस-05/05/1987)   -   बैशाख सुदी सप्तमी
14/05/2024 - मंगलवार - कोलकाता -
श्रीमती राज कुमारी चतुर्वेदी (राज माँ ) का निर्वाण दिवस (28/04/2004)   -   बैशाख सुदी अष्टमी
15/05/2024 - बुधवार - दिल्ली -
रांची , अंतरंग आनंद भवन का वार्षिकोत्सव (उदघाटन-09/06/2022)   -   ज्येष्ठ सुदी दशमी (गंगा दशहरा)
16/06/2024 - रविवार - रांची -
अमेरीका (वर्जिनिया),आनंद कुंज का वार्षिकोत्सव (उदघाटन-08/06/2014)   -   ज्येष्ठ सुदी दशमी (गंगा दशहरा)
16/06/2024 - रविवार - अमेरीका (वर्जिनिया) -
पुणे,मातृधारा आनन्द  सत्संग का वार्षिकोत्सव (उदघाटन-24/06/2010)   -   ज्येष्ठ सुदी तेरस
20/06/2024 - गुरूवार - पुणे -
श्रीमती बनासा देवी लाठ (माँ बनासा) का  निर्वाण दिवस--- (11-06-1957, मंडरेला)   -   ज्येष्ठ सुदी चतुर्दशी
21/06/2024 - शुक्रवार - मंडरेला -
वीरगंज (नेपाल), श्री महिला सत्संग सदन का वार्षिकोत्सव (उदघाटन-1983)   -   आषाढ़ सुदी दूज (रथ यात्रा)
07/07/2024 - रविवार - वीरगंज (नेपाल) -
नागपुर, आनंद भवन का वार्षिकोत्सव (उदघाटन-3/07/2011)   -   आषाढ़ सुदी दूज (रथ यात्रा)
07/07/2024 - रविवार - नागपुर -
आगामी उत्सव हिंदी तिथि के अनुसार दिये गयें है कृपया अंतिम जानकारी सबंधित सदनों से लें |(Year-2022-2023.) (Email :- info@bhavnirjharini.com)
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